Friday, 7 December 2012

वो दिव्यपुँज




वो दिव्यपुँज .......................

म तो निकल पड़े थे राह में अपनी,
मंज़िल अपनी पाने को ,
पाना था वो दिव्यपुँज ,
जो करता है रोशन पूरे इस जग को,
यह दिव्यपुँज है,
जो जितना है जलता,
उतना होता है रोशन.
जो जितना है तपता ,
उतना होता है दिव्य.
यह दिव्यपुँज है ,
जिसे पाना है मेरा लक्ष्य.
एक स्वप्निल प्रेरणा है ,
यह दिव्यपुँज,
जिसे पाना है मेरा कर्त्तव्य सहर्ष .

सपने आँखों में समेटे
घर से हम चले निकल
पर मालूम न था हमें
कि मुश्किल है राह बहुत
हम अकेले थे,
राह में थे लोग बहुत,
हौसला था हममें, विश्वास था हममें बहुत ,
धैर्य था हममें , संतोष था हममें बहुत,
लंबा सफर था , धुँधला ड्गर था,
करने को हमारा स्वागत,
बिछी थी धूल सड़क पर,
चलना था , बस चलना था
पर चलना था संभल -संभल कर.

कुछ निकल गए आगे,जो दिखते थे नहीं,
और कुछ दिखते थे , धुँधले से कहीं.
कुछ रह गए थे पीछे, जो गए थे खो कहीं,
और कुछ थक कर सो चुके थे ,
ओढ़ कर चादर धूल मिट्टी की.

साथ छूट चुका था सबका,
कुछ आगे थे और कुछ
रह गए थे पीछे कहीं.
और हम अकेले थे चले जा रहे थे,
बढ़े जा रहे थे .
दूर थी मंजिल , राह थी मुश्किल
कहीं ईंट, कहीं पत्थर
कहीं पहाड़ , कहीं दलदल
कहीं मोह , कहीं माया.
कहीं लालच, कहीं धोखा खाया.

पर हौसला आगे बढ़ने का न हमने भुलाया,
रास्ते के हर एक काँटे को,
जड़ से मिटाया.
और पाया वो मकाम ,
जिसका था हमें सपनों में इंतज़ार,
वो स्वप्निल प्रेरणा कि पाना है वह दिव्यपुँज
जो करता है रोशन पूरे इस जग को,
जो जितना है जलता,
उतना होता है रोशन.
जो जितना है तपता ,
उतना होता है दिव्य.
वह दिव्यपुँज ,
जिसे पाना है मेरा लक्ष्य सहर्ष ,
एक स्वप्निल प्रेरणा ,
वह  दिव्यपुँज.






                      - स्वप्निल शुक्ल

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47 comments:

  1. वाह ! स्वप्निल ..क्या खूब .
    - अनुराधा मित्तल


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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  2. awesome poetry . very inspiring !
    thanks for sharing .

    - Vipul sharma

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    1. thanks ...... your comment puts a grin on my face ..plz keep visiting !

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  3. स्वाति सक्सेना7 December 2012 at 05:38

    बहुत ही सुंदर कविता....शब्दों का चयन बेहद सराहनीय है ...अभार .
    - स्वाति सक्सेना

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  4. मोहन शुक्ल7 December 2012 at 05:38

    संघर्षों से लड़ते और जीतते हुए सफलता का दिव्यपुँज पाना ......."वो स्वप्निल प्रेरणा कि पाना है वह दिव्यपुँज ".......क्या खूब स्वप्निल जी..बधाई.
    - मोहन शुक्ल

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  5. अरविंद जैन7 December 2012 at 05:47

    आपको आभार व नमन इस खूबसूरत रचना को शेयर करने के लिये ....
    - अरविंद जैन

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  6. awesome poetry . very inspiring !
    thanks for sharing .

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    1. thanks ...... your comment puts a grin on my face ..plz keep visiting !

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  7. a very well written & interesting poetry . congr8
    -Barkha mishra

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    1. thanks ...... your comment puts a grin on my face ..plz keep visiting !

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  8. शिवानी द्त्ता7 December 2012 at 05:52

    अत्यंत खूबसूरत रचना ..... बधाई स्वप्निल जी. उम्मीद है भविष्य में भी ऐसी ही सुंदर कविताओं से हमारा साक्षात्कार होगा . शुब्भकामनाओं सहित .
    - शिवानी द्त्ता .

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  9. वाह..........
    बहुत सुन्दर कविता..
    बधाई.

    अनु

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  13. हौसला आगे बढ़ने का न हमने भुलाया,
    रास्ते के हर एक काँटे को,
    जड़ से मिटाया.
    और पाया वो मकाम ,
    जिसका था हमें सपनों में इंतज़ार

    वाऽह ! क्या बात है !
    स्वप्निल जी
    बधाई हो …
    पा लिया आपने दिव्यपुंज !

    सुंदर भाव ! सुंदर शब्द !
    खूबसूरत रचना !
    शुभकामनाओं सहित…

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  14. …और स्वागत है मेरे ब्लॉग की ताज़ा पोस्ट पर
    #
    12-12-12 के अद्भुत् संयोग के अवसर पर
    लीजिए आनंद ,
    कीजिए आस्वादन
    वर्ष 2012 के 12वें महीने की 12वीं तारीख को
    12 बज कर 12 मिनट 12 सैकंड पर
    शस्वरं पर पोस्ट किए
    मेरे लिखे 12 दोहों का

    :)

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  15. बहुत सुंदर..आशा जगाने वाली प्रस्तुति।।।

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  17. बहुत सुन्दर स्वप्निल जी. अच्छी रचना.
    नीरज 'नीर'
    KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  18. स्वप्निल जी बहुत सुन्दर ... ...आशा ही जीवन है
    भ्रमर 5

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  19. आदरणीया स्वप्निल शुक्ल जी ..बहुत नायाब प्यारे भाव ..स्वप्निल प्रेरणा युक्त स्वपन सब सच हों
    ..सुन्दर रचना ...
    यह दिव्यपुँज है,
    जो जितना है जलता,
    उतना होता है रोशन.
    जो जितना है तपता ,
    उतना होता है दिव्य.
    यह दिव्यपुँज है ,
    जिसे पाना है मेरा लक्ष्य.
    एक स्वप्निल प्रेरणा है ,
    यह दिव्यपुँज,
    जिसे पाना है मेरा कर्त्तव्य सहर्ष .
    भ्रमर ५

    15 April 2013 10:50 am

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  20. यह दिव्यपुँज है,
    जो जितना है जलता,
    उतना होता है रोशन.
    जो जितना है तपता ,
    उतना होता है दिव्य.
    यह दिव्यपुँज है ,
    जिसे पाना है मेरा लक्ष्य.
    एक स्वप्निल प्रेरणा है ,
    यह दिव्यपुँज,
    जिसे पाना है मेरा कर्त्तव्य सहर्ष .
    बहुत सुन्दर स्वप्निल जी. अच्छी रचना.

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    1. आपकी बहूमूल्य टिप्पणी के लिये आपको हृ्दय से धन्यवाद ......

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  21. अपना सपना पााने की बधाई स्वप्निल जी ।

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  22. बहुत सुन्दर रचना...सीधे दिल को छू लेती है..

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  23. कहीं ईंट, कहीं पत्थर
    कहीं पहाड़ , कहीं दलदल
    कहीं मोह , कहीं माया.
    कहीं लालच, कहीं धोखा ...

    सुंदर अभिव्यक्ति ...

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  24. यह दिव्यपुँज है,
    जो जितना है जलता,
    उतना होता है रोशन.
    जो जितना है तपता ,
    उतना होता है दिव्य.
    यह दिव्यपुँज है ,
    जिसे पाना है मेरा लक्ष्य.
    एक स्वप्निल प्रेरणा है ,
    यह दिव्यपुँज,
    जिसे पाना है मेरा कर्त्तव्य सहर्ष .
    बहुत सुन्दर स्वप्निल जी. अच्छी रचना.

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  25. AAj ek sal bad padhi aapki ye kawita. bahut achchi lagee. Badhaee aapko manjil pa lene kee.

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  26. जो जितना है जलता,
    उतना होता है रोशन.
    जो जितना है तपता ,
    उतना होता है दिव्य. ... बहुत ख़ूब ...

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  27. बहुत सुन्दर - प्रेरक प्रस्तुति

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  28. Thanks for visiting my page dear Swapnil ... Wish u great success ...Pl visit my music blog too ...
    www.reverbnation.com/pkkush

    Pramod Kush

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  29. Swpnil ji apke rachana vakai bahut pasand aayee maine apke aur bhi blog pr najar dali ..har blog behatareen hairan hoon etna sab kuchh kaise kr leti hain ap ......patr ptrikaon me bhi ap prkashit hoti rahati hain .....bhai wah ! der hi sahi pr acchhe insan se mulakat hui aaj .....badhdai ke sath aabhar bhi .

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