Wednesday, 26 September 2012

हिंदी हैं हम .................



हिंदी हैं हम .................


भाषा कुदरत की बड़ी देन  है. यह आपके -हमारे बीच जुड़ाव के लिये आवश्यक है पर जब बात हिंदी भाषा की हो तो , हम भारतवासियों के लिये हिंदी मात्र संवाद का साधन नहीं अपितु हमारी पहचान है .यदि कहा जाए कि हिंदी ही हमारी भारत माता के माथे की बिंदी है ........शोभा है तो यह किसी भी प्रकार से अतिशयोक्ति नहीं होगी.

माँ के आँचल में जन्नत बसती है जिसकी कुछ पल की पनाह के लिये इंसान सब कुछ हारने को तैयार हो जाता है . हिंदी जो कि हमारी मातृभाषा है, इसके आँचल की छाँव के नीचे हम सभी भारतवासी पले - बढ़े व एक दूसरे से जुड़ते आएं हैं और जुड़ते रहेंगे ....हिंदी भारतवासियों की शान है .......हम भारतवासियों के अस्तित्व का अभिन्न अंग ....हमारी पहचान है हिंदी पर आधुनिक समाज की विडंबना तो देखिये आज हमारी मातृ्भाषा को ही अपने अस्तित्व की रक्षा हेतु संघर्ष करना पड़ रहा है.

भारत सरकार हर वर्ष हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं उत्थान हेतु करोड़ों रुपये खर्च करती है. हर सरकारी दफ्तरों , कार्यालयों में सूचना जाती है कि कर कोई अपने कार्य के दौरान अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करे.  परंतु यदि हिंदी साहित्यकारों , प्रूफ - रीडर्स , संपादकों आदि को छोड़ बात करें तो हिंदी भाषा को संजोने का व उसके प्रचार- प्रसार के लिये कितने प्रयास और किस प्रकार के प्रयास हो रहे हैं और सरकार की इसमें कितनी सकारात्मक भूमिका है , यह बात किसी से भी छिपी नहीं .

आज पाश्चात्य सभ्यता हमारी भारतीय संस्कृ्ति के साथ -साथ हमारी मातृभाषा पर भी इतनी हावी हो गई है कि बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों में आम बोलचाल के दौरान भी लोग हिंदी के स्थान पर अंग्रेजी में बात करने पर अधिक गौरव महसूस करते हैं . माँ- बाप खुद अपने बच्चों से अपेक्षा करते हैं कि उनके बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलें ....फिर चाहे उन्हें उनकी मातृभाषा का 'क' , 'ख', 'ग', 'घ'..... भी सही से मालूम न हो पर  A, B, C, D ........... की जानकारी अवश्य हो. ..


वे उस अंग्रेजी परिवेश में अपने बच्चों को ढ़ालना चाहते हैं जहाँ उनके बच्चे .........can talk in english , can walk in english , live in english , even die only through english . फिर चाहे उनके बच्चों को अंग्रेजी में सही से लिखना भी नहीं आता हो पर वे बात जरुर अंग्रेजी में करना सीख जाएं वो भी अमरीकन ऎक्सेंट में.

अंग्रेजी भाषा एक अंतराष्ट्रीय भाषा है जिसकी अपनी उपयोगिता व महत्तव है जिसे किसी भी हाल में नज़र अंदाज नहीं किया जा सकता पर हम भारतवासियों का अपनी मातृ्भाषा हिंदी के साथ दिनों-दिन बढ़ता सौतेला बर्ताव सिर्फ और सिर्फ इस बात की ही ओर संकेत कर रहा है कि हम सभी भारतवासियों का अस्तित्व , हमारी पहचान घोर  संकट में है.

हमें अपने देश की मिट्टी की सुगंध को पह्चानना है,  हमारी मातृ्भाषा के आत्म- सम्मान , प्रतिष्ठा , गौरव व शान के लिये हर एक नागरिक को जागरुक होना पड़ेगा . मात्र अंग्रेजी बोल कर ही आप अपनी योग्यता सिद्ध कर सकते हैं या जो हिंदी भाषा में बात या अपना काम करते हैं, वे अयोग्य कहलाये या माने जाते हैं ; इस प्रकार के बेतुके व बेबुनियादी विचारों का त्याग करना होगा. संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठ अपने देश , अपनी मातृभाषा के लिये कुछ करना होगा .............यदि शुरुआत सोशल मीडिया से ही करें तो भी बेहतर परिणाम दृ्ष्टिगोचर होंगे . ज्यादा नहीं तो कम से कम फेसबुक पर अपने भारतीय मित्रों से ही हिंदी भाषा में बातचीत कर अपनी मातृ्भाषा के प्रति अपने स्नेह को व आदर को प्रदर्शित करें .......इसके अलावा स्कूल - कॉलेजेस में आम बोलचाल में अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करें ... आगे आने वाली पीढ़ी हिंदी विषय को भी गंभीरता से ले ......शिक्षा , मीडिया, साहित्य आदि क्षेत्रों में स्वयं को स्थापित कर अपनी मातृ्भाषा के गौरव और शान की रक्षा करें व इसका प्रचार- प्रसार करें ताकि हिंदी सदैव हमारी भारतमाता के माथे की बिंदी बन हर वक़्त चमकती रहे और हम सभी भारतवासियों को गौरवान्वित करती रहे.



                                      - स्वप्निल शुक्ल

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2 comments:

  1. great article swapnil ....& great thoughts ..thanks for sharing this eye opener & outstanding article...kudos

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  2. बिल्‍कुल सच कहा .. इस प्रभावी लेख को पढ़कर हम तो यही कहेंगे कि बेहद सराहनीय प्रस्तुति .... आभार

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