Friday, 10 August 2012

घुटन - 02


घुटन - 02

घुट- घुट के कब तक जिएंगे ये ज़िंदगी ,
खुशकिस्मती होती है उनकी ,
जिनको होती है कभी न कभी तो मौत नसीब .
घुटन भरी मौत भी कुछ हद तक दे जाती है ,
पलभर का सुकून कहीं ,
पर हमारी किस्मत अलग है ,
हमें तो नहीं होती है मौत भी नसीब .




                               - स्वप्निल शुक्ल

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