Wednesday, 1 August 2012

खुशियों की चाभी

                     खुशियों की चाभी




'जीवन के मीठे रस, जीवन के रंग व खूबसूरत ज़िन्दगी ' क्या सटीक परिभाषा है एक सफल व सुन्दर ज़िन्दगी की जहाँ हमारी दुनिया हमारे सपनों की दुनिया जैसी हो?
आम तौर पर किसी भी व्यक्ति की चाहत नाम, शोहरत व दौलत पाने की होती है जिसके लिये वो हर संभव प्रयास करता है. पर सबको सब कुछ मिल जाये बिना कुछ गंवाये , क्या यह संभव है? निःसंदेह मुश्किल तो है पर असंभव नहीं. पर वो, जिन्होंने सब कुछ खो कर ही कुछ या बहुत कुछ पाया है, वे अपनी कुंठाओं की प्रस्तुति किस प्रकार करते होंगे ? ज़िन्दगी में दौलत से बहुत कुछ खरीदा जा सकता है परंतु खुशियों को नहीं फिर भी लोग ज़िन्दगी की खुशी दौलत में ही तलाशते व दर्शाते हैं. पर आपका अपना अस्तित्व क्या है? दौलत के अलावा , आप क्या हैं? किस मुकाम पर हैं? यदि धनवान हैं तो नाम व पह्चान क्या है ?
कुछ लोगों से मैंने सुना कि मेरे बाप- दादाओं ने इतनी दौलत जोड़ कर रखी है तो मुझे काम करने की क्या जरुरत ? परन्तु व्यक्ति की पहचान तो उनके काम या उनके द्वारा किये गए कामों से ही  होती है. तो क्या ऐसे लोगों को पह्चान की भी जरुरत नहीं?

कुछ युवतियां जुगाड़ द्वारा अमीर घरौंदे में ब्याह कर धनवान महिला बन गईं और फिर श्रीमती फलाना कहलाई जाने लगीं .पहचान पूछने पर जवाब आता है ," मैं उनकी पत्नी हूं ,उस रईस खानदान की मैं बहु हूं ". पर वे क्या  हैं ? इस प्रश्न का जवाब कुछ इस प्रकार आता है कि, " ये कैसा बेहूदा सवाल है? मेरे पास इतनी दौलत है कि मैं दुनिया की हर वस्तु खरीद सकती हुं ,दौलत ही मेरी पह्चान है , खुशी है व सब कुछ है. दौलत के बिना कोई कुछ भी नहीं. क्या तुम्हारे पास दौलत है?"

ऐसे जवाब सुन मैं स्तब्ध रह जाती हूं. यही ख्याल आता है कि उफ्फ !! ये वक्त ! ये बददिमाग लोग !
भौतिकवाद के इस युग में धन की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता पर धन ही खुशियों की चाभी है , इस भ्रम को अपनाया नहीं जा सकता.
व्यक्ति को हर वक्त दौलत कमाने व अपनी शेखी बखारने से परे कुछ अच्छे कार्यों द्वारा अपना नाम व पहचान स्थापित करने के लिये भी प्रयासरत रहना चाहिये ताकि अन्य व्यक्ति उनका अनुसरण कर सकें. अच्छे कार्यों से तात्पर्य उन कार्यों से है जिनसे हमारे देश व समाज का कल्याण हो. वे अच्छे कार्य चाहे, एक सफल मां, बेटी , भाभी, बीवी, बहन, मित्र, बेटा, पिता, भाई, देवर, सास , ससुर आदि रिश्ते निभा के व अपनी जिम्मेदारियों को सम्पूर्ण कर, किये जाएं या व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भागीदारी देकर , जिन कार्यों से आप अन्य लोगों के लिये प्रेरणा बनें, वे कार्य ही आपको आपके अस्तित्व की पह्चान कराते हैं और ज़िन्दगी कि असली खुशी से आपका साक्षात्कार कराते हैं.


खुशियों की चाभी दौलत में नहीं बल्कि नेक कार्यों द्वारा स्वयं को एक सुखद अनुभूति प्रदान करने में है.  नेक कार्यों द्वारा प्राप्त खुशियां , शांति व सुख द्वारा बन जाती है आपकी ज़िन्दगी ठीक वैसी , सपनों की दुनिया के जैसी.





                                                       - स्वप्निल शुक्ल

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