Sunday, 12 August 2012

घुटन - 04



घुटन - 04

घुटन का धुँआ कुछ इस कदर उठा,
कि मानो जिस्म व रुह का भी दम घुटने हो लगा.
तब आखिरकार वो घुटन दिल व दिमाग को चीरती हुई
होंठो से बनकर निकली हूक ,
घुटन की हूक थी वो ज्वालामुखी के उबलते लावे का रुप ,
जिसने छोड़ा हमारा जिस्म व रुह लेकर रुप हुंकार का
और बजा दिया शंख सर्व विनाश के आरंभ का .
उस हुंकार में था पूर्ण विराम !
पूर्ण विराम : बुराई, बुरी शक्ति , बुरे लोग, बुरे कर्म का,
पूर्ण विराम : अधर्म, हिंसा, अशांति व दुष्कर्म का.



- स्वप्निल शुक्ल

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